
तीन राज्यों की चार लोकसभा सीटों कैराना (यूपी), पालघर (महाराष्ट्र), भंडारा-गोंदिया (महाराष्ट्र) और नगालैंड पर वोटिंग हुई। चारों में से तीन पर पहले बीजेपी के सांसद थे। चौथी सीट नगालैंड के मौजूदा मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के इस्तीफ से खाली हुई। वो बीजेपी के समर्थन वाले नगा पीपुल्स फ्रंट से हैं। यानी बीजेपी पर चारों सीटों को बचाए रखने का दबाव है। आंकड़ों को देखे तो पता चलता है कि 2014 के बाद 23 लोकसभा उपचुनाव हुए। जिसमें बीजेपी कोई नई सीट नहीं जीत पाई, उल्टा 10 से 6 सीट गंवा दीं। सिर्फ चार सीट ही जीत पाई। बीजेपी ने जिन 4 सीटों पर जीत हासिल की उसमें से एक पीएम मोदी, दूसरी असम के सीएम, तीसरी गोपीनाथ मुंडे की परंपरागत सीट थी। चौथी सीट (शहडोल) पर बहुत कम मार्जिन महज 60 हजार वोट से जीत हासिल की। ऐसे में लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हार-जीत के सात पैटर्न पता चलते हैं जिसका रिफ्लेक्शन 2019 के चुनाव में देखने को मिल सकता है।
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